अगर हम जम्भधोरा रांवासर के बारे में बात करे तो वह आज के राजस्थान के बीकानेर जिले की लुनकरणसर तहसील में रावांसर(Ravasar) गाँव के पास स्थित है। यहाँ पर गुरु जाम्भोजी ने लोगो को जीवो के प्रति दया भावना का परचा दिया था

रावांसर जम्भधोरा का इतिहास बिश्नोई समाज के ही नही संसार के हर एक व्यक्ति को जीवो के प्रति सदभावना रखने का सन्देश देता है।

ravasar jambhdhora
रावांसर जम्भधोरे पर हवन करते हुए

रावांसर(Ravasar) जम्भधोरा के संचालक स्वामी राजेन्द्रनंद जी(हरिद्वार वाले) के शिष्य स्वामी राघवानंद जी है।

रावांसर जम्भधोरा की व्यवस्था

रावांसर जम्भधोरा में स्वामी राघवानंद जी स्वय दोनों समय हवन करते है।

रावांसर जम्भधोरा में अमावस्या को सुबह पाहल बनाया जाता है, और यहाँ पर आने मात्र से ही सभी प्रकार के दुःख और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

रावांसर जम्भधोरा में भक्तजन किसी भी समय आ सकते है, और यहाँ भोजन और बिस्तर आदि सभी उत्तम व्यवस्थाये है।

Ravasar

रांवासर जम्भधोरा इतिहास(Ravasar Jambhdhora History)

रांवासर जम्भधोरा (Ravasar JambhDhora) का इतिहास बहुत ही निराला है। जिसके प्रमाण हमें आज भी वहा मिलते है।

नाथूसर गाँव जो पहले जम्भधोरे के पास होता था वहां श्री गुरु जम्बेश्वर भगवान अपनी गायो को चराते हुए आये थे वहा पर गुरु जाम्भोजी ने अपनी गायो के लिए पानी माँगा था, तो वहा के कुछ स्थानीय लोगो ने यह कहकर पानी देने से मन कर दिया कि “हमारे यहाँ पर पानी थोडा है और जो है वो पानी खारा है“।

ऐसा सुनकर गुरु जाम्भोजी ने कहा कि “आपकी सारी मनोकामना पूरी हो” और वह वहां से चल दिए, और नाथूसर के पास एक टीले पर खेजड़ी(जो आज जम्भधोरे के नाम से प्रचलित है) के निचे आकर विराजमान हुए।

गुरु जाम्भोजी इस खेजड़ी के निचे विराजमान हुए थे।

अगले दिन कुछ लोग आये और कहा की हमारे गाँव नाथूसर में पूरा पानी सुख गया है और जो बचा है वो खारा हो गया है, “आप हमारी रक्षा करें”

तब गुरु महाराज ने कहा कि आपके गाँव में तो पहले ही पानी कम था और जो था वो खारा था।

तब गाँव वालो ने कहा की नहीं गुरुदेव हमारे पानी पहले मीठा था और बहुत सारा था, तो गुरु देव ने अपनी आपबीती सुनाई की नाथूसर के कुछ लोगो ने गायो के लिए पानी नही दिया, और कहा कि “हमारे यहाँ पर पानी थोडा है और जो है वो पानी खारा है“।

गुरु महाराज ने हमेशा कहा है कि “पशु पक्षियों के लिए मन में दया भाव रखे”

गुरु जम्बेश्वर भगवान ने अपने शब्दवाणी  के शब्दों में भी कहा है कि “जो जैसी इच्छा रखेगा उसको वेसा ही फल मिलेगा”

फिर गांववालों ने कहा की अब गलती हो गई है इसका कोई उपाए बताये, तो गुरु महाराज ने कहा आप यहाँ से इतना दूर जाकर पानी खोदो जहा से में आपको न देख सकु, वहा पर मीठा पानी निकलेगा।

इसी कारण मीठे पानी के लिए पूरा नाथूसर वहां से प्रस्थान करके कुछ दुरी पर जहा गुरु जी ने मीठा पानी होने का कहा था वहा बस गया।

आश्चर्य की बात ये है की जम्भधोरा रावांसर में और उसके आस पास में अभी भी पानी खारा है और जम्भधोरा से कुछ दुरी पर वर्तमान नाथूसर गाँव में पानी मीठा है।

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जीवदया का प्रमाण