गुरु जाम्भोजी बिश्नोई पंथ के संस्थापक माने जाते हैं। बिश्नोई समाज में उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और इसी रूप में उनकी पूजा की जाती है। गुरु जाम्भोजी ने अपने जीवनकाल में मानव कल्याण, जीव रक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सत्य जीवन का संदेश दिया। उन्होंने जहां-जहां भ्रमण किया और अपने उपदेश दिए, वे सभी स्थान आज बिश्नोई समाज के लिए अत्यंत पवित्र धाम माने जाते हैं।
इन स्थानों पर समय-समय पर विशाल मेले आयोजित होते हैं, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन धामों का धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। यहां आपको बिश्नोई समाज के प्रमुख अष्टधामों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।
पीपासर धाम
पीपासर धाम गुरु जाम्भोजी की जन्मस्थली और अवतार स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह राजस्थान के नागौर जिले में स्थित है तथा मुकाम धाम से लगभग 10-12 किलोमीटर दक्षिण दिशा में स्थित है। नागौर शहर से इसकी दूरी लगभग 45 किलोमीटर है।
बिश्नोई समाज के लिए यह स्थान अत्यंत पूजनीय माना जाता है क्योंकि यहीं पर गुरु जाम्भोजी ने अपने जीवन का प्रारंभिक समय बिताया और पहली बार अपनी शब्दवाणी का उच्चारण किया था। गांव में वह ऐतिहासिक कुआं आज भी मौजूद है, जिसके पास गुरु जाम्भोजी ने पहला उपदेश दिया था। हालांकि वर्तमान समय में यह कुआं बंद पड़ा है, लेकिन इसकी धार्मिक महत्ता आज भी बनी हुई है।
कहा जाता है कि इसी कुएं के पास राव दूदाजी ने गुरु जाम्भोजी को चमत्कारिक रूप से पशुओं को पानी पिलाते हुए देखा था। वर्तमान में यहां साथरी और मंदिर बने हुए हैं, जिनकी देखरेख संतजन करते हैं। श्रद्धालु यहां आकर गुरु जाम्भोजी की जन्मभूमि के दर्शन करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मुकाम धाम
मुकाम धाम बिश्नोई समाज का सबसे प्रमुख और पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। यह राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील में स्थित है और नोखा से लगभग 16 किलोमीटर दूर है। यहां गुरु जाम्भोजी की पवित्र समाधि स्थित है, जिसके कारण इसका विशेष महत्व है।
मान्यता है कि गुरु जाम्भोजी ने अपने स्वर्गवास से पहले समाधि स्थल के रूप में खेजड़ी और जाल के वृक्षों को निशानी के रूप में बताया था। उन्होंने कहा था कि वहां 24 हाथ खुदाई करने पर शिवजी का धूणा और त्रिशूल प्राप्त होगा। बाद में खुदाई के दौरान धूणा और त्रिशूल प्राप्त हुए और वहीं पर गुरु जाम्भोजी की समाधि स्थापित की गई।
आज यहां भव्य मंदिर बना हुआ है और हर वर्ष फाल्गुन एवं आसोज अमावस्या को विशाल मेले आयोजित होते हैं। इन मेलों में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वर्तमान समय में लगभग हर अमावस्या को यहां भारी संख्या में भक्त आते हैं।
समराथल धोरा
समराथल धोरा बिश्नोई पंथ का प्रमुख उपदेश स्थल माना जाता है। यह बीकानेर जिले की नोखा तहसील में स्थित है और मुकाम धाम से लगभग 2 किलोमीटर दक्षिण दिशा में स्थित है।
गुरु जाम्भोजी ने यहां लगभग 51 वर्षों तक निवास किया और मानव कल्याण हेतु अपने उपदेश दिए। यहीं पर उन्होंने जीव दया, पर्यावरण संरक्षण और नैतिक जीवन के सिद्धांतों का प्रचार किया। बिश्नोई पंथ के 29 नियमों का महत्व भी इसी स्थान से जुड़ा हुआ माना जाता है।
संवत 1542 में जब भयंकर अकाल पड़ा था, तब गुरु जाम्भोजी ने अपनी अलौकिक शक्तियों से लोगों और पशुओं की सहायता की थी। इसी कारण यह स्थान बिश्नोई समाज में अत्यधिक श्रद्धा का केंद्र है।
जांगलू धाम
जांगलू गांव राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है और देशनोक से लगभग 10-12 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम दिशा में है। यहां गुरु जाम्भोजी का प्राचीन मंदिर स्थित है।
इस मंदिर में गुरु जाम्भोजी का चोला और चिम्पी सुरक्षित रखे गए हैं। मान्यता है कि यहां रखी हुई चिम्पी वही है जो सैंसा के घर खंडित हो गई थी। मूल चिम्पी आज भी सुरक्षित रखी गई है और उसका उपयोग नहीं किया जाता।
श्रद्धालु अमावस्या के दिन घी से चिम्पी भरकर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। कहा जाता है कि मोहोजी मुकाम से चोला, चिम्पी और टोपी लेकर जांगलू आए थे। बाद में टोपी वापस मुकाम भेज दी गई, लेकिन चोला और चिम्पी आज भी यहां सुरक्षित हैं।
लोदीपुर धाम
लोदीपुर धाम उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित है। यह मुरादाबाद-दिल्ली रेलवे लाइन पर स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
गुरु जाम्भोजी अपने भ्रमण के दौरान यहां पहुंचे थे। लोगों में वृक्षों के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना जागृत करने के उद्देश्य से उन्होंने यहां खेजड़ी का वृक्ष लगाया था। यह वृक्ष आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
इसी खेजड़ी वृक्ष के पास गुरु जाम्भोजी का मंदिर बना हुआ है। यहां प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या को विशाल मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
रोटू धाम
रोटू धाम राजस्थान के नागौर जिले की जायल तहसील में स्थित है। यह नागौर से लगभग 30 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। यहां वर्तमान समय में एक भव्य मंदिर बना हुआ है।
इस स्थान का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां गुरु जाम्भोजी ने अक्षय तृतीया संवत 1572 को जोखे भादू की बेटी उमा (नारंगी) को भात भरा था। लोगों की प्रार्थना पर गुरु जाम्भोजी ने यहां खेजड़ी के वृक्षों का विशाल बाग लगाया था।
यह खेजड़ी का बाग आज भी मौजूद है। यहां हजारों पक्षी विश्राम करते हैं और मान्यता है कि वे आसपास के खेतों से अन्न का एक दाना भी नहीं चुगते। यह स्थान प्रकृति और जीव रक्षा के संदेश का प्रतीक माना जाता है।
जाम्भोळाव धाम
जाम्भोळाव धाम राजस्थान के जोधपुर जिले की फलोदी तहसील में स्थित है। फलोदी से लगभग 15-20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में यह पवित्र स्थल स्थित है।
यहां एक विशाल तालाब है जिसे गुरु जाम्भोजी ने बनवाया था। मंदिर में सफेद मकराना पत्थर का एक सिंहासन बना हुआ है। मान्यता है कि गुरु जाम्भोजी इसी सिंहासन पर बैठकर तालाब की खुदाई का कार्य देखते थे।
यहां साधुओं की दो प्रमुख परंपराएं प्रचलित हैं — आगुणी जांगा और आथूणी जांगा। इस धाम पर प्रत्येक वर्ष चैत्र अमावस्या और भाद्रपद पूर्णिमा को विशाल मेले आयोजित किए जाते हैं।
लालासर धाम
लालासर धाम राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील में स्थित है। यह बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है तथा मुकाम धाम से लगभग 25-30 किलोमीटर दूर जंगल क्षेत्र में स्थित है।
यह स्थान गुरु जाम्भोजी के निर्वाण स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। बिश्नोई पंथ के संस्थापक गुरु जाम्भोजी ने मिगसर वदी नवमी संवत 1593 को यहां अपना भौतिक शरीर त्याग किया था। बिश्नोई समाज में इस दिन को “चिलत नवमी” के रूप में मनाया जाता है।
मान्यता है कि गुरु जाम्भोजी ने हरी कंकेड़ी के नीचे समाधि ली थी। आज उस स्थान पर पक्का चबूतरा बना हुआ है और श्रद्धालु वहां दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां चिलत नवमी के अवसर पर विशाल मेला आयोजित होता है और वर्तमान में यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण भी किया जा रहा है।
बिश्नोई समाज के ये सभी अष्टधाम केवल धार्मिक स्थल ही नहीं हैं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जीव दया, सत्य और मानव सेवा के जीवंत प्रतीक भी हैं। गुरु जाम्भोजी द्वारा दिए गए सिद्धांत आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रेरणा प्रदान करते हैं।
Respected sir
Sir bishnoi samaj ke bare nain jankari collect kar raha hu. Isme nujhe apki sahayata milegi.
Cont No – 9784004633,
8875076773
ji jarur aap muje Instagram pe contact kar sakte hai